Regenerative Agriculture पुनर्योजी कृषि क्या है।

Regenerative Agriculture भारत एक कृषि प्रधान देश है जहां के अधिकांश आबादी कृषि पर आश्रित है लेकिन बदलते पर्यावरण के मानकों के अनुसार लगातार जमीनों के दोहन के कारण उत्पादन क्षमता पर विपरीत असर पड़ रहा है इसलिए आवश्यकता है। की नवीन तकनीकी का कृषि में इस्तेमाल किया जाए जिससे मर्दा के स्वास्थ्य को विशेष महत्व दिया जाए अगर मिट्टी स्वस्थ होगी तो अनाज भी स्वस्थ पैदा होगाRegenerative Agriculture
पुनर्योजी कृषि पद्धति
Regenerative Agriculture पुनर्योजी कृषि क्या है।
पुनर्योजी कृषि की एक ऐसी पद्धति है जिसमें मरता के स्वास्थ्य को महत्व प्रदान किया गया है जब मिट्टी स्वस्थ होगी तो उस के माध्यम से अनाज की पैदावार होगी वह भी स्वस्थ होगी कृषि कि यह तकनीक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने सहित उद्योगों के नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव को भी कम कर सकती है यह लोगों के भोजन और पोषण की आवश्यकताओं की पूर्ति करने में भी मील का पत्थर साबित होगीRegenerative Agriculture
पुनर्योजी कृषि के माध्यम से जनता में सुधार करके मिट्टी के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले महत्वपूर्ण तक समुदाय को अबाधित छोड़ देती है जिससे कृषि की इस प्रणाली में फसल चक्र के माध्यम से फसल उत्पादन को बढ़ाने का प्रयास किया जाता है इसके साथ ही रासायनिक उर्वरक की जगह जैविक खाद का प्रयोग किया जाता है जो मिट्टी में पोषक तत्वों की पुन प्राप्ति में मदद करती है पुनर्योजी कृषि और इसे संबंध नेटवर्क का वैश्विक स्तर पर विस्तार हो रहा है रीजेनरेशन इंटरनेशनल नामक संगठन एशिया लेटिन अमेरिका संयुक्त राज्य अमेरिका कनाडा अफ्रीका यूरोप ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में कृषि की पद्धति का बढ़ावा दे रहा है साथ इजराइल में भी इस तकनीकी का विस्तार हो रहा है
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Regenerative Agriculture पुनर्योजी कृषि क्या है।
पुनर्योजी कृषि की आवश्यकता
मर्दा के निम्नीकरण पर अंकुश लगाना विश्व के आर्थिक मंच पर कृषि भूमि के लगातार दोहन से कृषि में उर्वरक क्षमता का हास हुआ है जिसके कारण प्रतिवर्ष भारत में 400 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर उत्पादकता की हानि हो रही है और इस तरह अगर लगातार भूमिका यूं ही धन चलता रहा तो आने वाले समय में खाद्य संकट उत्पन्न हो सकता है इसका दे संकट को दूर करने के लिए हमें मर्दा के स्वास्थ्य पर और मर्दा के के रखरखाव पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है
Regenerative Agriculture पुनर्योजी कृषि क्या है।

पुनर्योजी कृषि के द्वारा मृदा पर पड़ने वाले प्रभाव को दूर किया जा सकता है Regenerative Agricultureवर्तमान में बढ़ती हुई वैश्विक भोजन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए खाद्य उत्पादन को अधिकतम करने पर जोर दिया जा रहा है इसके लिए वैश्विक स्तर पर और कीटनाशकों आदि का प्रयोग किया जा रहा है और जिससे मृदा जैसे बहुमूल्य संसाधनों को क्षति पहुंच रही है पुनर्योजी कृषि को बढ़ावा देकर बढ़ती हुई वैश्विक भोजन की आवश्यकता की पूर्ति आसानी से की जा सकती है इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर और संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अफ्रीका में पुनर्योजी कृषि पर शोध संचालित किया गया है
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और इसमें पाया गया कि यदि अफ्रीका में पूर्ण विरोधी कर लागू की जाती है तो फसल की पैदावार 2040 तक 13 परसेंट बढ़ सकती है मिट्टी व पौधों में वायुमंडल में उपस्थित कार्बन के लिए कार्बन सिंह का भी कार्य करते हैं वर्तमान में प्रचलित कृषि पद्धति मिट्टी में प्राकृतिक रूप से जमा ब्व्2 को वर्तमान में निरमुक्त करने के लिए जिम्मेदार होती है संयुक्त राष्ट्र के अनुसार वैश्विक स्तर पर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कृषि का योगदान एक तिहाई से अधिक है विश्व के आर्थिक मंच का अनुमान है यदि विश्व के 20ः किसानों किसानों द्वारा पूर्ण कृषि जलवायु स्मार्ट कृषि पद्धति को अपनाया जाता है तो इसमें 2030 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 6ः की कमी की जा सकती है जय विविधता को बढ़ावा देना के माध्यम से जनता को भी बढ़ावा दिया जा सकता है ऑस्ट्रेलिया की सरकार द्वारा किए गए शोध के अनुसार एक सूक्ष्म जीव होते हैं इस प्रकार मिट्टी विभिन्न प्रकार के कीट आदि प्रजातियों के लिए एक आवाज की तरह कार्य करती है स्वस्थ मिट्टी में विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक प्रक्रिया संपन्न होती है जिसके माध्यम से अनेक पारिस्थितिक तंत्र सेवाएं उपलब्ध करवाई जाती है इसलिए स्वस्थ होगी तो उसमें रहने वाले अनेक प्रजातियों के लिए भी लाभदायक होगा एवं अनाज उत्पादन स्वस्थ पैदा होगा
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पुनर्योजी कृषि को अपनाने में आने वाली चुनौतियां

कृषि तकनीक के माध्यम से उत्पादकता से ज्यादा मिट्टी के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाती है जिससे वर्तमान में चल रही प्रचलित कृषि पद्धति के माध्यम के उत्पादन से कम होगा लेकिन मनुष्य की भोजन की आवश्यकता की पूर्ति में ऐसा सहायक है भारतीय किसान इस प्रणाली को अपनाने में किसानों की कुछ आर्थिक समस्याएं भी बड़ी बाधा है साथ ग्रहण क्षेत्र के किसानों विभिन्न प्रकार के कृषि पर ऋण ले रखे हैं वह इस नवीन तकनीकी को अपनाने में असमर्थ है क्योंकि कृषि क्षेत्र में वित्त एवं ऋण सुविधा अपर्याप्त है
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जो भारतीय परिदृश्य में पुनर्योजी कृषि के लिए प्रमुख बाधा है साथी भारतीय कृषक समुदाय के मध्य साक्षरता का स्तर भी काफी कम है इस कारण कृषक नवीन एवं पर्यावरण मित्र कृषि पद्धतियों के बारे में कम जानते हैं टेक्नोलॉजी के बारे में उन्हें ज्ञान कम है और जानकारी एवं जागरूकता के अभाव में उन्होंने परंपरागत कृषि को ही अच्छा माना है साथ ही छोटी-छोटी कम आकार वाले खेत कम कृषि बजट आवंटन भी इसको अपनाने में बाधा उत्पन्न करते हैं अनुसंधान में विकास पर निजी व सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा किया जाने वाला निवेश तथा खर्च निम्न स्तर पर बना हुआ है सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के संचालन के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र में आधारभूत ढांचा काफी दयनीय स्थिति में है इसमें पर्याप्त सुधार की आवश्यकता है
पुनर्योजी कृषि का क्या समाधान हो सकता है
Regenerative Agriculture पुनर्योजी कृषि क्या है।
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Regenerative Agricultureपुनर्योजी कृषि क्या है।
देश के द्वारा पीपीपी मॉडल को अपनाना पुनर्योजी कृषि को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है कि सार्वजनिक व निजी क्षेत्र द्वारा अनुसंधान एवं विकास में निवेश किया जाए सरकार पुनर्योजी कृषि से संबंधित अनुसंधान प्रक्रियाओं को सब्सिडी देकर प्रोत्साहित कर सकती है कृषकों के मध्य जागरूकता का प्रसार कर सकती है कृषकों के लिए आवश्यक सेमिनार के द्वारा एवं विशेष प्रकार के कैंप लगाकर के इस जागरूकता को बढ़ाया जा सकता है संबंधित इंस्टिट्यूट में एग्रीकल्चर विषय को अधिकाधिक बच्चों को लेने के लिए प्रोत्साहित करना और सरकार प्रगतिशील कृषकों को पूंजी निवेश के लिए एक निश्चित मात्रा पर आर्थिक समर्थन प्रदान कर सकती है इससे फसल उत्पादन में होने वाले किसी भी हानि को संतुलित किया जा सकता है
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Regenerative Agriculture पुनर्योजी कृषि क्या है।

भविष्य की राह
पुनर्योजी कृषि के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की सतत कृषि तकनीकों का उपयोग किया जाता है और कृषि से उत्पन्न कचरे का पुनर्चक्रण कर खाद के रूप में इसका उपयोग किया जाता है कृषि की यह पद्धति पर्यावरण मित्र है और इसे अपनाने से वैश्विक तापमान में भी कमी होगी कृषि के पद्धति चरण मौसमी गतिविधियों को बारंबारता को भी कम करने में सहायक है इससे बहुआयामी लाभ को देखते हुए वर्तमान में इसको वैश्विक स्तर पर अपनाने की दर में वृद्धि देखी जा रही है जैसा शरीर में हम अनाज के रूप में खाएंगे वैसा ही शरीर बनेगा क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है कृषि क्षेत्र में ऐसी तकनीकों का प्रयोग किया जाना चाहिए जिससे मृदा का स्वास्थ्य बना रहे हैं और मृदा से उत्पादन होने वाला अनाज में आवश्यक पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिले इसलिए हम सबको प्रयास करके नवीन तकनीकी का कृषि क्षेत्र में प्रयोग करें और भारतीय कृषि को अग्रिम बनाने में हम अपना योगदान दे सकते हैं